Tuesday, August 26, 2008
सामाजिक नेटवर्किंग का माध्यम बन रही आईटी
Monday, August 25, 2008
बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर

बिहार में बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित सुपौल, मधेपुरा और अररिया जिलों में स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है तथा राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 26 हो गई है वहीं सेना के जवान हेलिकाप्टरों के माध्यम से पीड़ितों के बीच राहत एवं बचाव कार्य में लगे हैं।
मधेपुरा से यहां प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार कोसी नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के कारण जिले के तेरह में से 11 प्रखंड बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। जिले के मधेपुरा सदर, ग्वालपाडा, कुमारखंड, शंकरपुर, मुरलीगंज, उदाकिशनगंज, बिहारीगंज, चौसा, आलमनगर, उरैनी और सिहेंश्वर प्रखंड की लगभग 15 लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित हो गई है। बाढ़ के कारण हजारों एकड़ में लगी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई है।
रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए पूरे जिले में 30 राहत शिविर खोले हैं जहां पीड़ितों को भोजन के साथ अन्य आवश्यक सामान मुहैया कराए जा रहे हैं। इसके अलावा पानी से घिरे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए 28 नाव भी लगाई गई हैं। हेलिकाप्टरों की सहायता से बाढ़ग्रस्त इलाकों में प्रतिदिन भोजन के पैकेट गिराए जा रहे है।
रिपोर्ट के अनुसार सहरसा और मधेपुरा को छोड़कर सभी मार्गो पर ट्रेन यातायात बाधित है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 106 और 107 पर कई स्थानों पर पानी आ जाने के कारण आवागमन ठप्प हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सभी शिक्षण संस्थानों को अनिश्चित काल के लिए बंद रखने का आदेश दिया है। विशेष जिलाधिकारी ए.के. चौधरी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
अररिया से प्राप्त रिपार्ट के अनुसार कोसी नदी में उफान से जिले के भरगमा, नरपतगंज और रानीगंज प्रखंड के करीब 80 गांव प्रभावित हैं और बाढ़ का पानी लगातार नए इलाकों में फैल रहा है। बाढ़ के कारण कई एकड़ में लगी लाखों रुपये मूल्य की फसल नष्ट हो गई है और लोग ऊंचे स्थानों पर पलायन कर गए है।
राज्य के गन्ना मंत्री नीतीश मिश्रा स्वयं अररिया में रहकर राहत एवं बचाव कार्य की देखरेख कर रहे हैं। इस बीच लापरवाही के आरोप में जिला प्रशासन ने नरपतगंज के प्रखंड विकास पदाधिकारी अशोक तिवारी को निलंबित कर दिया है। सिकरी के प्रखंड विकास पदाधिकारी राकेश रंजन को नरपत गंज का अतिरिक्त प्रभाव सौंपा है।
रिपोर्ट के अनुसार भरगामा प्रखंड के सेबरबनी, शंकरपुर, जयनगर, शेखपुरा समेत कअी पंचायतों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। सेना और सशस्त्र सीमा बल के जवान प्रभावितों के बीच राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। पीड़ितों की सहायता के लिए भरगामा में पांच और नरपत में दो राहत केंद्र बनाए गए हैं, जहां से पीड़ितों को खाद्यान एवं जरूरी सामानों की आपूर्ति की जा रही है।
बाढ़ से अब तक नौका दुर्घटना तथा अन्य घटनाओं में भागलपुर में छह, मधेपुरा में दस, पूर्णिया में तीन, पश्चिम चंपारण के बगहा में चार और समस्तीपुर में तीन लोगों की मौत हो चुकी है।
Saturday, August 23, 2008
बिहारी मेहनत से खाते हैं, भीख से नहीं
बयान वापस ले नाईक नीतीश कुमार ने कहा है कि गोवा के गृहमंत्री के पद पर रहते हुए एक राजनेता को किसी भी राज्य के नागरिकों के बारें में अपमानजनक टिप्पणी करने से बचना चाहिए था , यह एक राजनेता के लिए शोभा नहीं देता है।उन्होंने कहा है कि रवि नाईक के बयान की सभी दलों द्वारा निंदा की जानी चाहिए तथा नाईक को अपने शब्दों को खेद प्रकट करते हुए वापस लेना चाहिए।
क्या है मामलागौरतलब है कि गोवा के गृहमंत्री रवि नाईक ने मंगलवार को गोवा विधानसभा में अपने दिए गए बयान में कहा था की गोवा में अधिकांश भिखारी दूसरे राज्यों के रहते है और पटना से गोवा सीधी ट्रेन चलने से बिहार के भिखारी गोवा पहुंच जाएंगे और यह परेशानी और बढ़ जाएगी।
Thursday, August 21, 2008
नेता दे रहे क़ानून को "कानूनी सलाह"
जिसे मुख्यमंत्री नीतिश कुमार भी मानते है.बस इसी बात पर मंत्री भोला सिंह आपे से बाहर हो गए.और क़ानून को ही नशीहत देने लगे,और अपने दायरे में रहने को कहा। जिसकी कड़ी आलोचना हो रही है.बकौल भोला सिंह ने कोर्ट से पूछा की इतने सारे मुक़दमे क्यों लंबित है? उन पर जल्दी सुनवायी क्यों नही हो रही है? कोर्ट अपना काम देखे और हम अपना। नयी सरकार आने के बाद हर जगह निर्माण कार्य चल रहा है.रोड बन रही है,नाले बनाये जा रहे है,जिसके कारण काफी तोड़फोड़ हुआ है। और भारी बारिश ने रही सही कसर पुरी कर दी.जिससे पुरा पटना कचडे के ढेर जैसा हो गया है.लेकिन ऐसा भी नही है की सरकार कुछ कर भी नही रही?नीतिश कुमार का कहना है की इस साल भर कस्ट है,अगले साल से ऐसा नही होगा.मुख्यमंत्री ने भी मंत्री की टिपण्णी को गैर वाजिब बताया और इसकी निंदा की। मंत्री महोदय को अपनी सीमा नही भूलनी चाहिये । क्योंकि नेताओं की तो नैतिकता हामारे देश में ख़तम हो गयी है। और कहीं अगर सच और नैतिकता बाकी है तो वो क़ानून में ही है।
Sunday, June 1, 2008
बिहार के नेता कर रहे पहलवानी
विपक्ष को जैसे एक लालिपोप मुद्दा मिलगाया है।दरशल इन नेताओं को विकाश और जनता की कोई परवाह नही है।
नरेंदर सिंह बराबर किसी ना किसी विवादों मे घिरे रहते है .यहाँ भी जातिवाद मुख्य समस्या का ज़र है । कुछ नेता लोग अभी भी पुरानी लालू की सरकार वाली मानसिकता से ग्रस्त है .जो नए बिहार के निर्माण मे बाधक है । जिस तरह नीतिश २४ घंटे काम कर रहे है ,उन नेताओं को उनसे सबक लेना चाहिए । बिहार नए करवट ले रहा है। लेकिन इन नेताओं को विकसित बिहार बनाने से कोल मतलब नही है.आज जहाँ राज्य मे हर जगह रोड बन रहे है,अस्पतालों मे डॉक्टर मिल रहे है ,मुफ्त दवाएयाँ मिल रही है। किसानों को अच्छी क्वालिटी के बीज मिल रहे है।
लगभग हर दिशा मे सरकार अच्छा काम कर रही है। नया बिहार आकार ले रहा है ।लेकिन इन नेताओं की वज़ह से कुछ न कुछ नकारात्मक प्रवाभ सरकार पर, पर रहा है।जनता इनको अगले चुनाव मे सबक जरूर सिखायेगी ।
Thursday, May 1, 2008
कलयुगी गुरु-शिष्य परंपरा की एक और घिनौनी मिसाल
धनबाद के स्कूल में हुई इस सनसनीखेज वारदात में महज चंद रुपयों के गायब होने पर स्कूल के टीचरों ने लड़कियों को बेआबरू कर डाला। लड़कियां चीखतीं और चिल्लातीं रहीं, लेकिन कलयुगी टीचर छात्राओं के दर्द से बेअसर रहे। धनबाद के सीनियर पुलिस अफसर रतन कुमार के मुताबिक एक लड़की के करीब 45 रुपये गायब हो जाने पर टीचरों ने करीब 16 लड़कियों को एक कमरे में बारी-बारी से बुलाकर उनके पूरे कपड़े उतारकर तलाशी ली।
पुलिस के मुताबिक गर्ल स्टूडेंट्स को इस तरह से कपड़े उतारकर तलाशी देने के लिए मजबूर करना बिल्कुल गलत है। दूसरी ओर, घटना के बाद लोकल लोगों में जबर्दस्त गुस्सा है। मामले की भनक लगते ही मंगलवार को सैकड़ों लोगों ने स्कूल के सामने प्रदर्शन किया और स्कूल के स्टूडेंटों ने दोषी टीचरों पर कार्रवाई की मांग करते हुए क्लास का बायकॉट करने का फैसला किया है।
हंगामे के बाद स्कूल के प्रिंसिपल समेत कई टीचर छुट्टी पर चले गए हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। गौरतलब है कि देश में छात्रों को शारीरिक सजा दिए जाने पर पाबंदी है, लेकिन यह ज्यादातर स्कूलों में बेहद आम है। पिछले साल दिल्ली में होमवर्क न करने की सजा के तौर पर एक सात साल की बच्ची को टीचर ने बेंच पर बिना कपड़ों के खड़ा कर दिया था। 2007 में हुई एक स्टडी भी देश में मासूमों पर हो रहे जुर्म की तस्दीक करती है। इस स्टडी के मुताबिक भारत में दो-तिहाई बच्चे घर या स्कूल में शारीरिक ज्यादती के शिकार हैं।